आखिर कब तक सिर्फ ज्ञापन और आश्वासन? हिंदू संगठनों का सवाल— “कार्रवाई कब होगी?”रानी बेग प्रकरण सहित विभिन्न मामलों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, शिवसेना गोरक्षा न्यास ने चेताया— न्याय मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन
मध्यप्रदेश के धार मे मध्यप्रदेश युवा शिवसेना गोरक्षा न्यास ने एक बार फिर विभिन्न विवादित मामलों को लेकर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन के पदाधिकारियों ने धार कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि जिन मामलों को लेकर लंबे समय से शिकायतें और आवेदन दिए जा रहे हैं, उनमें अब केवल जांच नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई दिखाई देना चाहिए।
ज्ञापन में संगठन ने मंदसौर महिला थाना प्रभारी रानी बेग से जुड़े विवाद, एक नाबालिग के कथित धर्मांतरण, तथा नगर निगम और समग्र आईडी से जुड़े कथित दस्तावेजी अनियमितताओं के मामलों की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। संगठन का कहना है कि यदि किसी भी मामले में शिकायतें बार-बार सामने आ रही हैं तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि जांच किस स्तर पर पहुंची और अब तक क्या कार्रवाई हुई।
शिवसेना गोरक्षा न्यास के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष सिंह चौहान ने कहा कि समाज के विभिन्न वर्ग लगातार अपनी बात प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन यदि लंबे समय तक केवल “जांच जारी है” जैसे उत्तर मिलते रहें तो लोगों में निराशा बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि जनता अब परिणाम देखना चाहती है।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि सनातन समाज की भावनाओं, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े मामलों में सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उनका कहना है कि कानून सबके लिए समान है और यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन हुआ है तो निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होना आवश्यक है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान राष्ट्रीय सचिव फूल्लू पहलवान कदम, धार जिलाध्यक्ष बलराम कदम, कुलदीप सिंदूरिया, सचिन सिंदूरिया, सतीश सूजन, अर्जुन मुंडा, अंबाराम बाथम, प्रकाश मंडा, विष्णु सिंदूरिया, सुमित मांझी, चिंटू चौहान, बलराम सिंदूरिया, प्रकाश सारण, दिवाकर उपाध्याय, विजय पांचाल, पप्पू कुमार मकवाना, संजय परमार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
संगठन ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिकायतों और आरोपों की निष्पक्ष जांच तथा न्यायपूर्ण कार्रवाई सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यदि मामलों में समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक तरीके से जनजागरण और आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
“जनता पूछ रही है…”
“आखिर कब तक फाइलों में घूमते रहेंगे आवेदन? कब तक मिलता रहेगा सिर्फ जांच का आश्वासन? क्या जनता को न्याय के लिए वर्षों इंतजार करना होगा, या फिर सरकार और प्रशासन अब इन मामलों में ठोस कार्रवाई कर विश्वास कायम करेंगे?”
यही प्रश्न आज समाज के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सबकी निगाहें प्रशासन एवं सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
प्रधान संपादक
नयन लववंशी
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